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Govt Imposes Import Curbs on Silver: Bharat Sarkar Ka Bada Faisla, Bazaar Mein Halchal

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 Govt Imposes Import Curbs on Silver: Bharat Sarkar Ka Bada Faisla, Bazaar Mein Halchal नई दिल्ली: भारत सरकार ने चांदी (Silver) के आयात पर सख्ती बढ़ाते हुए नए Import Curbs लागू कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम देश के बढ़ते व्यापार घाटे (Trade Deficit) को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार को स्थिर रखने के लिए उठाया गया है। इस फैसले के बाद सर्राफा बाजार, उद्योग जगत और निवेशकों के बीच हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, हाल के महीनों में भारत में चांदी के आयात में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी मात्रा में चांदी विदेशों से आने के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुछ श्रेणियों में आयात नियमों को कड़ा कर दिया है। व्यापार मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अब चांदी के आयात के लिए अतिरिक्त निगरानी, दस्तावेज़ी प्रक्रिया और कुछ मामलों में विशेष अनुमति की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि सरकार ने अभी तक पूरी तरह से Import Ban नहीं लगाया है, लेकिन नए नियमों के कारण आयात की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। सर्राफा व्यापारिय...

RAMAYANA की सच्चाई – क्या रामायण वास्तव में हुई थी?

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RAMAYANA की सच्चाई – क्या रामायण वास्तव में हुई थी? परिचय रामायण भारत के सबसे प्राचीन और महान ग्रंथों में से एक मानी जाती है। इस महाकाव्य की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी। करोड़ों लोग इसे आस्था, धर्म और संस्कृति का प्रतीक मानते हैं। लेकिन आज bhi कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या रामायण केवल एक कहानी है या इसका संबंध वास्तविक इतिहास से भी है? श्री राम का जीवन हिंदू धर्म के अनुसार श्री राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। उनका जन्म अयोध्या में हुआ था। रामायण में उनके जीवन की अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन मिलता है, जैसे 14 वर्ष का वनवास, माता सीता का हरण और रावण के साथ युद्ध। राम सेतु का रहस्य रामायण का सबसे चर्चित विषय राम सेतु है। कथा के अनुसार भगवान राम की वानर सेना ने समुद्र पर पत्थरों का पुल बनाया था ताकि लंका पहुँचा जा सके। आज भी भारत और श्रीलंका के बीच समुद्र में एक श्रृंखला जैसी संरचना दिखाई देती है, जिसे कई लोग राम सेतु मानते हैं। इसी कारण रामायण को लेकर लोगों की जिज्ञासा और बढ़ जाती है। रावण का सच रामायण में रावण को लंका का शक्तिशाली राजा बताया गया है। वह...

Ambedkar Jayanti

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती को हर साल 14 अप्रैल को मनाया जाता है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती को हर साल 14 अप्रैल को मनाया जाता है। यह भारतीय समाज के महान नेता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती है, जो भारतीय संविधान के मुख्य लेखक और भारतीय संविधान निर्माता थे। इस दिन को भारत भर में अनेक रूपों में मनाया जाता है, जैसे कि समारोह, उपासना, विशेष भाषण आदि। यह दिन उनके योगदान को स्मरण करने और उनके विचारों को फैलाने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन को अम्बेडकर जी की जन्मतिथि के रूप में मनाया जाता है और यह भारतीय समाज में समाजिक न्याय, समरसता और समानता की महत्वपूर्ण गुणवत्ता को प्रतिष्ठापित करता है।    जीवनी  👇   डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जीवन एक अत्यधिक प्रेरणादायक और उदाहरणीय है। वह 14 अप्रैल, 1891 में मध्य प्रदेश के महू गांव में जन्मे थे। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल, जो एक आधीनिक शिक्षक थे, और माता का नाम भीमाबाई था। बाबासाहेब अम्बेडकर का जीवन संघर्षों और समाज को समर्पित कार्यों से भरा रहा। उन्होंने अपने जीवन में अनेकों कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उन्होंने हमेशा समाज क...

Udyam Registrations

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" Udyam Registration " उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन वीडियो में देखें Click करें भारतीय सरकार का एक पहल है जो व्यापारिक या उद्यमिता के क्षेत्र में काम कर रहे छोटे व्यापारों को समर्थन प्रदान करने के लिए शुरू की गई है। यह पंजीकरण आधिकारिक रूप से आपको " Udyam Registration " या " Udyam Certificate " प्राप्त करने का अवसर देता है, जिससे आपको विभिन्न सरकारी योजनाओं और लाभों का उपयोग करने की अनुमति मिलती है। यहां कुछ " Udyam Registration " के लाभ हैं: 1. **वित्तीय समर्थन** : उद्यम पंजीकरण के बाद, छोटे व्यवसायों को बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं से वित्तीय समर्थन प्राप्त करने की सुविधा मिलती है। 2. **सरकारी योजनाओं और लाभ** : यह पंजीकरण आपको सरकारी योजनाओं, उपलब्धियों और लाभों के उपयोग के लिए योग्य बनाता है। इसमें वित्तीय सहायता, छूट, और प्रोत्साहन शामिल हो सकते हैं। 3. **विपणन और विक्रय में समर्थन** : आप "Udyam Registration" के माध्यम से अपने उत्पादों और सेवाओं की बेहतर विपणन और विक्रय की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। 4. * *क्रेडिट सक्ष...

Divya Drishti : चैत्र नवरात्रि हिन्दू (Chaitra Navratri)

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  चैत्र नवरात्रि हिन्दू (Chaitra Navratri) पर्व है जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान, लोग नौ दिन तक नवदुर्गा का पूजन करते हैं और नौ दिनों के अलग-अलग रूपों की आराधना करते हैं। यह पर्व हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण है और लोग इसे श्रद्धा भाव से मनाते हैं। चैत्र नवरात्रि का उत्सव हिन्दुओं के विभिन्न भागों में विशेष रूप से मनाया जाता है, जैसे कि उत्तर भारत में यह पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिरों में आराधना, कीर्तन, और ध्यान का विशेष आयोजन किया जाता है। भारत में बहुत से राज्य हैं जहां चैत्र नवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है। यहां कुछ राज्यों की सूची दी गई है जहां चैत्र नवरात्रि का उत्सव प्रमुखतः मनाया जाता है: 1. उत्तर प्रदेश     2. बिहार           3. झारखण्ड 4. राजस्थान 5. पंजाब 6. हरियाणा 7. गुजरात 8. मध्य प्रदेश 9. हिमाचल प्रदेश 10. उत्तराखंड 11. छत्तीसगढ़ यह केवल कुछ उदाहरण हैं, और अन्य राज्यों में भी चैत्र नवरात्रि का महत्वपूर्ण उत्सव के रूप में मनाया जाता है। जी हां, निम्नलिखित राज्यों ...

Divya Drishti: मृत्यु का अर्थ

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मृत्यु का अर्थ है- "जीवन का अन्त, आयु की समाप्ति, मरण अथवा देहान्त। 'गीता' में कहा गया है कि- "जैसे जीव के इस देह के लिए लड़कपन, जवानी और बुढ़ापा है, उसी तरह उसके लिए दूसरी देह को पाना (मरना) है, जो लोग धीरज वाले हैं, उनको इससे घबराहट नहीं होती।"[1] यथा देही शरीरेऽस्मिन् , कौमारं यौवनं जरा। तथा देहान्तर प्राप्तिधीरस्तत्र न मुह्यति। “जैसे पुराने कपड़े को उतार कर मनुष्य दूसरे नये कपड़े को पहनता है उसी तरह से पुरानी देह छोड़कर जीव दूसरी नयी देह में चला जाता है।” वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि र्गृीति नरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संजाति नवानि देही। गीता के इन वचनों के साथ भागवत की बात भी याद पड़ी, उसमें वासुदेव जी ने कंस को समझाते हुए कहा है कि, “जब मनुष्य मर जाता है तो जीव अपनी करनी के मुताबिक़ बेबसों की तरह दूसरी देह को पाकर अपनी पुरानी देह को छोड़ देता है-” देहे पंचत्वमापन्ने देही कर्मानुगोऽवश:। देहान्तरमनुप्राप्य प्राक्तनं त्यज्यते वपु : । जैसे 'तृण जलौका' चलने के समय जब एक पाँव रख लेता है, तब दूसरा पाँव उठाता है, उसी प्रकार करनी के अनु...

Divya Drishti: कलि युग - कलयुग है चारम पर

हिन्दू सिद्धान्त: युग और कलियुग विश्व की आयु के सम्बन्ध में हिन्दू सिद्धान्त विश्व की आयु के सम्बन्ध में हिन्दू सिद्धान्त तीन प्रकार के समयविभाग उपस्थित करता है। वे हैं-युग, मन्वन्तर एवं कल्प। युग चार हैं-कृत, त्रेता, द्वापर एवं कलि। ये प्राचीनोक्त स्वर्ण, रूपा, पीतल एवं लौह युग के समानार्थक हैं। उपर्युक्त नाम जुए के पासे के पक्षों के आधार पर रखे गए हैं। कृत सबसे भाग्यवान् माना जाता है, जिसके पक्षों पर चार बिन्दु हैं, त्रेता पर तीन, द्वापर पर दो एक कलि पर मात्र एक बिन्दु है। ये ही सब सिद्धान्त युगों के गुण एवं आयु पर भी घटते हैं। युग आयु युगों में मनुष्य के अच्छे गुणों का ह्रास होता है तथा युगों की आयु भी क्रमश: 4800 वर्ष, 3600 वर्ष, 2400 वर्ष व 1200 वर्ष है। सभी के योग को 'महायुग' कहते हैं, जो 12000 वर्ष का है। किन्तु ये वर्ष दैवी हैं और एक दैवी वर्ष 360 मानवीय वर्ष के तुल्य होता है, अतएव एक महायुग 43,20,000 वर्ष का होता है। कलि का मानवीय युगमान 4,32,000 वर्ष है। मान्यताएँ ...