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Showing posts from April 7, 2024

Ambedkar Jayanti

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती को हर साल 14 अप्रैल को मनाया जाता है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती को हर साल 14 अप्रैल को मनाया जाता है। यह भारतीय समाज के महान नेता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती है, जो भारतीय संविधान के मुख्य लेखक और भारतीय संविधान निर्माता थे। इस दिन को भारत भर में अनेक रूपों में मनाया जाता है, जैसे कि समारोह, उपासना, विशेष भाषण आदि। यह दिन उनके योगदान को स्मरण करने और उनके विचारों को फैलाने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन को अम्बेडकर जी की जन्मतिथि के रूप में मनाया जाता है और यह भारतीय समाज में समाजिक न्याय, समरसता और समानता की महत्वपूर्ण गुणवत्ता को प्रतिष्ठापित करता है।    जीवनी  👇   डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जीवन एक अत्यधिक प्रेरणादायक और उदाहरणीय है। वह 14 अप्रैल, 1891 में मध्य प्रदेश के महू गांव में जन्मे थे। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल, जो एक आधीनिक शिक्षक थे, और माता का नाम भीमाबाई था। बाबासाहेब अम्बेडकर का जीवन संघर्षों और समाज को समर्पित कार्यों से भरा रहा। उन्होंने अपने जीवन में अनेकों कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उन्होंने हमेशा समाज क...

Udyam Registrations

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" Udyam Registration " उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन वीडियो में देखें Click करें भारतीय सरकार का एक पहल है जो व्यापारिक या उद्यमिता के क्षेत्र में काम कर रहे छोटे व्यापारों को समर्थन प्रदान करने के लिए शुरू की गई है। यह पंजीकरण आधिकारिक रूप से आपको " Udyam Registration " या " Udyam Certificate " प्राप्त करने का अवसर देता है, जिससे आपको विभिन्न सरकारी योजनाओं और लाभों का उपयोग करने की अनुमति मिलती है। यहां कुछ " Udyam Registration " के लाभ हैं: 1. **वित्तीय समर्थन** : उद्यम पंजीकरण के बाद, छोटे व्यवसायों को बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं से वित्तीय समर्थन प्राप्त करने की सुविधा मिलती है। 2. **सरकारी योजनाओं और लाभ** : यह पंजीकरण आपको सरकारी योजनाओं, उपलब्धियों और लाभों के उपयोग के लिए योग्य बनाता है। इसमें वित्तीय सहायता, छूट, और प्रोत्साहन शामिल हो सकते हैं। 3. **विपणन और विक्रय में समर्थन** : आप "Udyam Registration" के माध्यम से अपने उत्पादों और सेवाओं की बेहतर विपणन और विक्रय की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। 4. * *क्रेडिट सक्ष...

Divya Drishti : चैत्र नवरात्रि हिन्दू (Chaitra Navratri)

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  चैत्र नवरात्रि हिन्दू (Chaitra Navratri) पर्व है जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान, लोग नौ दिन तक नवदुर्गा का पूजन करते हैं और नौ दिनों के अलग-अलग रूपों की आराधना करते हैं। यह पर्व हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण है और लोग इसे श्रद्धा भाव से मनाते हैं। चैत्र नवरात्रि का उत्सव हिन्दुओं के विभिन्न भागों में विशेष रूप से मनाया जाता है, जैसे कि उत्तर भारत में यह पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिरों में आराधना, कीर्तन, और ध्यान का विशेष आयोजन किया जाता है। भारत में बहुत से राज्य हैं जहां चैत्र नवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है। यहां कुछ राज्यों की सूची दी गई है जहां चैत्र नवरात्रि का उत्सव प्रमुखतः मनाया जाता है: 1. उत्तर प्रदेश     2. बिहार           3. झारखण्ड 4. राजस्थान 5. पंजाब 6. हरियाणा 7. गुजरात 8. मध्य प्रदेश 9. हिमाचल प्रदेश 10. उत्तराखंड 11. छत्तीसगढ़ यह केवल कुछ उदाहरण हैं, और अन्य राज्यों में भी चैत्र नवरात्रि का महत्वपूर्ण उत्सव के रूप में मनाया जाता है। जी हां, निम्नलिखित राज्यों ...

Divya Drishti: मृत्यु का अर्थ

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मृत्यु का अर्थ है- "जीवन का अन्त, आयु की समाप्ति, मरण अथवा देहान्त। 'गीता' में कहा गया है कि- "जैसे जीव के इस देह के लिए लड़कपन, जवानी और बुढ़ापा है, उसी तरह उसके लिए दूसरी देह को पाना (मरना) है, जो लोग धीरज वाले हैं, उनको इससे घबराहट नहीं होती।"[1] यथा देही शरीरेऽस्मिन् , कौमारं यौवनं जरा। तथा देहान्तर प्राप्तिधीरस्तत्र न मुह्यति। “जैसे पुराने कपड़े को उतार कर मनुष्य दूसरे नये कपड़े को पहनता है उसी तरह से पुरानी देह छोड़कर जीव दूसरी नयी देह में चला जाता है।” वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि र्गृीति नरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संजाति नवानि देही। गीता के इन वचनों के साथ भागवत की बात भी याद पड़ी, उसमें वासुदेव जी ने कंस को समझाते हुए कहा है कि, “जब मनुष्य मर जाता है तो जीव अपनी करनी के मुताबिक़ बेबसों की तरह दूसरी देह को पाकर अपनी पुरानी देह को छोड़ देता है-” देहे पंचत्वमापन्ने देही कर्मानुगोऽवश:। देहान्तरमनुप्राप्य प्राक्तनं त्यज्यते वपु : । जैसे 'तृण जलौका' चलने के समय जब एक पाँव रख लेता है, तब दूसरा पाँव उठाता है, उसी प्रकार करनी के अनु...