Friday, 29 March 2024

Divya Drishti : हनुमान - Hanuman

 हनुमान हिंदू धर्म में भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त और भारतीय महाकाव्य रामायण में सबसे महत्वपूर्ण पौराणिक चरित्र हैं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार हनुमान एक वानर वीर थे। (वास्तव में वानर एक विशेष मानव जाति ही थी, जिसका धार्मिक लांछन (चिह्न) वानर अथवा उसकी लांगल थी। पुरा कथाओं में यही वानर (पशु) रूप में वर्णित है।) भगवान राम को हनुमान ऋष्यमूक पर्वत के पास मिले थे। हनुमान जी राम के अनन्य मित्र, सहायक और भक्त सिद्ध हुए। सीता का अन्वेषण (खोज) करने के लिए ये लंका गए। राम के दौत्य (सन्देश देना, दूत का कार्य) का इन्होंने अद्भुत निर्वाह किया। राम-रावण युद्ध में भी इनका पराक्रम प्रसिद्ध है। वाल्मीकि रामायण सुन्दर काण्ड के अनुसार लंका में समुद्रतट पर स्थित एक 'अरिष्ट' नामक पर्वत है, जिस पर चढ़कर हनुमान ने लंका से लौटते समय, समुद्र को कूद कर पार किया था। रामावत वैष्णव धर्म के विकास के साथ हनुमान का भी दैवीकरण हुआ। वे राम के पार्षद और पुन: पूज्य देव रूप में मान्य हो गये। धीरे-धीरे हनुमंत अथवा मारूति पूजा का एक सम्प्रदाय ही बन गया। 'हनुमत्कल्प' में इनके ध्यान और पूजा का विधान पाया जाता है। रामभक्तों द्वारा स्नान ध्यान, भजन-पूजन और सामूहिक पूजा में हनुमान चालीसा और हनुमान जी की आरती के विशेष आयोजन किया जाता है।

जन्मकथा

अप्सरा पुंजिकस्थली (अंजनी नाम से प्रसिद्ध) केसरी नामक वानर की पत्नी थी। वह अत्यंत सुंदरी थी तथा आभूषणों से सुसज्जित होकर एक पर्वत शिखर पर खड़ी थी। उनके सौंदर्य पर मुग्ध होकर वायु देव ने उनका आलिंगन किया। व्रतधारिणी अंजनी बहुत घबरा गयी किंतु वायु देव के वरदान से उसकी कोख से हनुमान ने जन्म लिया। जन्म लेने के बाद हनुमान ने आकाश में चमकते हुए सूर्य को फल समझा और उड़कर लेने के लिए आकाश-मार्ग में गये। मार्ग में उनकी टक्कर राहु से हो गयी। राहु घबराया हुआ इन्द्र के पास पहुंचा और बोला- 'हे इन्द्र, तुमने मुझे अपनी क्षुधा के समाधान के लिए सूर्य और चंद्रमा दिए थे।

आज अमावस्या है, अत: मैं सूर्य को ग्रसने गया था, किंतु वहां तो कोई और ही जा रहा है।' इन्द्र क्रुद्ध होकर ऐरावत पर बैठकर चल पड़े। राहु उनसे भी पहले घटनास्थल पर गया। हनुमान ने उसे भी फल समझा तथा उसकी ओर झपटे। उसने इन्द्र को आवाज़ दी। तभी हनुमान ने ऐरावत को देखा। उसे और भी बड़ा फल जानकर वे पकड़ने के लिए बढ़े। इन्द्र ने क्रुद्ध होकर अपने वज्र से प्रहार किया, जिससे हनुमान की बायीं ठोड़ी टूट गयी और वे नीचे गिरे। यह देखकर पवनदेव हनुमान को उठाकर एक गुफ़ा में चले गये। संसार-भर की वायु उन्होंने रोक ली। लोग वायु के अभाव से पीड़ित होकर मरने लगे। मनुष्य-रूपी प्रजा ब्रह्मा के पास गयी। ब्रह्मा विभिन्न देवताओं को लेकर पवनदेव के पास पहुंचे। उनके स्पर्शमात्र से हनुमान ठीक हो गये। साथ आए देवताओं से ब्रह्मा ने कहा- 'यह बालक भविष्य में तुम्हारे लिए हितकर होगा। अत: इसे अनेक वरदानों से विभूषित करो।'

वरदान

1.इन्द्र ने प्रसन्नता से स्वर्ण के कमल की माला देकर कहा- 'मेरे वज्र से इसकी हनु टूटी है, अत: यह हनुमान कहलायेगा। मेरे वज्र से यह नहीं मरेगा।'
2.सूर्य ने अपना सौंवा भाग हनुमान को दे दिया और भविष्य में सब शास्त्र पढ़ाने का उत्तरदायित्व लिया।
3.यम ने उसे अपने दंड से अभय कर दिया कि वह यम के प्रकोप से नहीं मर पायेगा।
4.वरुण ने दस लाख वर्ष तक वर्षादि में नहीं मरने का वर दिया।
5.कुबेर ने अपने अस्त्र-शस्त्रों से निर्भय कर दिया।
6.महादेव ने किसी भी अस्त्र से न मरने का वर दिया।
7.ब्रह्मा ने हनुमान को दीर्घायु बताया और ब्रह्मास्त्र से न मरने का वर दिया। साथ ही यह वर भी प्रदान किया कि वह इच्छानुसार रूप धारण करने में समर्थ होगा।
8.विश्वकर्मा ने अपने बनाये अस्त्र-शस्त्रों से उसे निर्भय कर दिया।
वर-प्राप्ति के उपरांत हनुमान उद्धत भाव से घूमने लगे। यज्ञ करते हुए मुनियों की सामग्री बिखेर देते या उन्हें तंग करते। पिता वायु और केसरी के रोकने पर भी वे रुकते नहीं थे। अंगिरा और भृगुवंश में उत्पन्न ऋषियों ने क्रुद्ध होकर उन्हें शाप दिया कि ये अपने बल को भूल जायें। जब कोई उन्हें फिर से याद दिलाए तब उनका बल बढ़े।

अंजनी का क्रोध


अंजनी ने हनुमान नामक पुत्र वानर रूप में देखा तो उसे शिव के रूप से भिन्न जानकर वह पवन देव से रुष्ट हो गयी। उसने हनुमान को शिखर से नीचे फेंक दिया। उसके गिरने से पर्वत चूर-चूर हो गया। धरती कांपी, सब व्याकुल हो गये। हनुमान ने पृथ्वी पर गिरकर आकाश में सूर्य उगता देख उसे निगलना चाहा। राहु भाग गया। हनुमान इन्द्र की ओर भी झपटा। इन्द्र ने उस पर प्रहार किया। शिव ने आकाशवाणी में बताया कि वह उनका पुत्र है, उसे समस्त देवताओं के वर प्राप्त हैं। पवन ने अंजनी को सब कह सुनाया और बालक थमा दिया। हनुमान ने सूर्य से विद्या सीखी और गुरु-दक्षिणास्वरूप यह वचन दिया कि वह सूर्य-पुत्र सुग्रीव का साथ देगा।
रामकथा में हनुमान
सीता-हरण के उपरांत राम रावण से युद्ध करने की तैयारी में लग गये। सुग्रीव की वानर सेना ने राम का पूरा साथ दिया। सुरसा रामायण के अनुसार समुद्र में रहने वाली नागमाता थी। सीताजी की खोज में समुद्र पार करने के समय सुरसा ने राक्षसी का रूप धारण कर हनुमान का रास्ता रोका और उन्हें खा जाने के लिए उद्धत हुई। समझाने पर जब वह नहीं मानी, तब हनुमान ने अपना शरीर उससे भी बड़ा कर लिया। जैसे-जैसे सुरसा अपना मुँह बढ़ाती जाती, वैसे-वैसे हनुमान शरीर बढ़ाते जाते। बाद में हनुमान ने अचानक ही अपना शरीर बहुत छोटा कर लिया और सुरसा के मुँह में प्रवेश करके तुरंत ही बाहर निकल आये। सुरसा ने प्रसन्न होकर हनुमान को आशीर्वाद दिया तथा उनकी सफलता की कामना की। सुरसा का सामना करने के बाद रामभक्त हनुमान सीताजी की खोज के लिए आगे बढ़ गये।
रामचंद्र ने हनुमान को अपना दूत बनाकर लंका नगरी में रावण के पास भेजा। लंका के निकट पहुंचकर हनुमान ने बहुत छोटा रूप धारण किया तथा रात्रि के अंधकार में उसमें प्रवेश किया। लंका एक भयंकर नारी का रूप धारण करके हनुमान के पास पहुंची और बोली- 'मैं इस नगरी की रक्षा करती हूं, तुम मुझे परास्त किये बिना इसमें प्रवेश नहीं पा सकते।' साथ ही लंका ने हनुमान के मुंह पर एक चपत लगायी। हनुमान ने उसे नारी जानकर एक हल्का-सा घूंसा मारा किंतु वह गिर पड़ी और परास्त हो गयी। तदनंतर अत्यंत मुदित भाव से बोली-'मुझे ब्रह्मा ने वरदान दिया था कि जब कोई वानर आकर तुम्हें परास्त कर देगा तब समझ लेना, राक्षसों का नाश हो जायेगा। रावण ने सीता-हरण के द्वारा राक्षसों के नाश को आमन्त्रित किया है। तुम सीता को जाकर ढूंढ़ो।'

सीताजी से भेंट


हनुमान ने अशोकवाटिका में सीता को राम का संदेश दिया तथा लंका नगरी में उत्पात खड़ा कर दिया। अनेक राक्षसों को परास्त करके हनुमान ने अपनी वीरता का प्रदर्शन किया। अंत में रावण ने मेघनाद को भेजा। मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करके हनुमान को बांध लिया तथा उसे रावण के पास ले गया। रावण ने पहले तो हनुमान को मृत्युदंड देने का विचार किया किंतु विभीषण के यह सुझाने पर कि किसी के दूत को मारना उचित नहीं है, रावण ने उनकी पूंछ जलवाकर छोड़ दिया। जलती हुई पूंछ से हनुमान ने समस्त लंका जला डाली, फिर सीता को प्रणाम करके, समुद्र पार करके अंगद के पास पहुँचे। राम-रावण के प्रत्यक्ष युद्ध में भी हनुमान का अद्वितीय योगदान था। युद्धक्षेत्र में शत्रुओं के नाश और मित्रों की परिचर्या में वह समान रूप से दत्तचित्त रहते थे।

संजीवनी औषधि

एक बार युद्ध करते समय मेघनाद ने युद्धस्थल में ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। उससे अधिकांश वानर सेना तथा राम-लक्ष्मण मूर्च्छित होकर गिर गये। मेघनाद प्रसन्नतापूर्वक लंका में लौट गया। विभीषण और हनुमान जांबवान को ढूंढ़ने लगे। घायल जांबवान ने विभीषण को देखते ही हनुमान का कुशल-क्षेम पूछा। विभीषण के यह पूछने पर कि आपने राम-लक्ष्मण, सेना आदि सबको छोड़कर हनुमान के विषय में ही क्यों पूछा तो जांबवान ने उत्तर दिया कि हनुमान ही एक मात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो हिमालय से औषधि ला सकते हैं, जो सबके जीवन की रक्षा करने में समर्थ है। तदनंतर जांबवान ने औषधिपर्वत का मार्ग तथा औषधियों की पहचान बतलायी। उसने मृत संजीवनी, विशल्यकरणी, सावर्ण्यकरणी तथा संधानकरणी नामक चार औषधियां लाने के लिए कहा। हनुमान ने अविलम्ब प्रस्थान किया। औषधि पर्वत पर पहुंचकर हनुमान ने देखा कि औषधियां विलुप्त हो गयीं, अत: दिखनी बंद हो गयीं। उन्होंने क्रुद्ध होकर औषधि पर्वत का शिखर उठा लिया और उड़ते हुए वानर सेना तथा राम-लक्ष्मण के निकट पहुंचे। पर्वत से ऐसी सुंगध आ रही थी कि राम और लक्ष्मण उठ बैठे। युद्ध के कारण जितने भी वानर मृतप्राय पड़े थे, वे सभी उस गंध से उठ बैठे, किंतु राक्षसों को उनसे कोई लाभ नहीं हुआ क्योंकि मृतकों के सम्मानार्थ उन सभी राक्षसों को समुद्र में फेंक दिया गया था जो युद्ध में मारे गये थे। तदनंतर हनुमान उस पर्वत-शृंग को पुन: पर्वत पर रख आये। उन्होंने रामचंद्र की सहायता की। रावण शिव-भक्त थे किंतु राम ने शिव की आज्ञा ग्रहण करके ही रावण का नाश किया। शिव की भक्ति से मदमस्त होकर रावण ने एक बार कैलाश पर्वत को उखाड़ लिया था, फलत: रुष्ट होकर शिव ने शाप दिया था- 'कोई मनुष्य तुम्हारा नाश करेगा।' इसी कारण रावण कुमार्गगामी हो गया था।

पउम चरित के अनुसार

वरुण से रावण के युद्ध में रावण की ओर से हनुमान ने युद्ध किया तथा उसके समस्त पुत्रों को बंदी बना लिया। वरुण ने अपनी पुत्री सत्यवती का तथा रावण ने अपनी दुहिता अनंगकुसुमा का विवाह हनुमान से कर दिया। सीता-हरण के संदर्भ में खर दूषण-वध का समाचार लेकर राक्षस-दूत हनुमान की सभा में पहुंचा तो अंत:पुर में शोक छा गया। अनंगकुसुमा मूर्च्छित हो गयी। तभी सुग्रीव के दूत ने वहां पहुंचकर कृत्रिम सुग्रीव (साहसगति) के वध का समाचार दिया तथा कहा कि सुग्रीव ने हनुमान को बुलाया है। हनुमान ने राम के पास पहुंचकर कृतज्ञता-ज्ञापन किया तथा कृतज्ञतावश श्रीराम का साथ देने का निश्चय किया। वह राक्षस समुदाय को शांत करके सीता को राम से मिलाने के लिए चल पड़े। मार्ग में महेंद्र आदि को राम की सहायतार्थ पहुंचने के लिए कहते गये। ससैन्य हनुमान ने लंका में पहुंचकर विभीषण को प्रेरित किया कि वह रावण को नर-नारी संग से बचने के लिए कहे। विभीषण पहले भी प्रयत्न कर चुका था तथापि उसने फिर से रावण से बात करने की ठानी। हनुमान ने रामप्रदत्त मुद्रिका सीता को दी। राम की विरहजन्य व्यथा बताकर तथा सीता को न घबराने का संदेश देकर हनुमान ने सीता का दिय। हनुमानजी ने सीता को राम का कुशल-क्षेम सुनाकर भोजन करने के लिए तैयार किया। हनुमान की कुलकन्याओं ने भोजन प्रस्तुत किया। तदनंतर हनुमान ने सीता से कहा- "आप मेरे कंधे पर चढ़ जाइये, मैं आप को रात तक पहुंचा देता हूं।" सीता ने पर-पुरुष का स्पर्श करना उचित न समझकर ऐसा नहीं किया और राम तक यह संदेश पहुंचाने के लिए कहा कि वे अपने पूर्व वीर कृत्यों का स्मरण कर सीता को छुड़ा ले जायें। रावण को हनुमान के नंदन वन में पहुंचकर सीता से बात करने का समाचार मिला तो उसने उसे पकड़ लाने के लिए सेवकों को भेजा। हनुमान ने नंदन वन के वृक्ष तोड़-ताड़कर उन्हें मारा-पीटा। लंका को तहस-नहस करके वह रावण के पास पहुंचा। रावण के कहने से उसे जंजीरों से बांध दिया गया। हनुमान उन बंधनों को तोड़कर किष्किंधापुरी की ओर चल दिये। राम-लक्ष्मण को सीता का संदेश देकर पवन-पुत्र ने अपने सहयोगियों को एकत्र किया तथा राम ने सभा मंडल को संदेश भेजा।




Tuesday, 26 March 2024

Divya Drishti : चित्रगुप्त पूजा

 चित्रगुप्त पूजा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो चित्रगुप्त देवता की पूजा और आराधना के लिए मनाया

 जाता है। चित्रगुप्त देवता हिंदू धर्म में यमराज के मंत्री माने जाते हैं और उन्हें लोग कर्मचारी देवता मानते हैं, जो लोगों

 के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। इस पूजा को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है।


चित्रगुप्त पूजा में लोग चित्रगुप्त देवता को पूजते हैं और

 उनके लिए विशेष भोग चढ़ाते हैं। पूजा के दौरान विधिवत

 अर्चना, आरती, भजन, और मंत्र उच्चारण किया जाता है। लोग अपने कर्मों के लिए चित्रगुप्त देवता से क्षमा प्रार्थना

 करते हैं और उनसे अच्छे कर्मों की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।


चित्रगुप्त पूजा का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि लोग अपने कर्मों का सच्चा लेखा-जोखा रखें और उनके द्वारा किए


 गए पाप और पुण्य का संदेश लें। यह पूजा अपने कर्मों की सच्चाई को समझने और सजग रहने के लिए महत्वपूर्ण होती है।


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Divya Drishti : Ramayana - रामायण

 The Ramayana is one of the most revered and ancient epic poems in Hindu mythology. It tells the story of Lord Rama, the seventh incarnation of Lord Vishnu, and his journey to rescue his wife Sita from the demon king Ravana. Here are some key aspects of the Ramayana:


1. **Authorship**: Traditionally attributed to the sage Valmiki, the Ramayana is believed to have been composed over 2,000 years ago.


2. **Plot**: The epic narrates the life and adventures of Lord Rama, his exile to the forest for 14 years along with his wife Sita and brother Lakshmana, the abduction of Sita by Ravana, and the subsequent war between Rama and Ravana's forces.


3. **Characters**: The Ramayana features several important characters, including Lord Rama, Sita, Lakshmana, Hanuman, Ravana, and many others, each playing a significant role in the story.


4. **Themes**: The Ramayana explores various themes such as dharma (duty/righteousness), devotion, loyalty, the battle between good and evil, and the triumph of righteousness over wickedness.


5. **Teachings**: The epic provides moral and ethical lessons, emphasizing the importance of virtue, loyalty, humility, and the consequences of one's actions.


6. **Versions**: The Ramayana exists in multiple versions and has been retold and adapted in various languages and cultures across South and Southeast Asia.


7. **Influence**: The Ramayana continues to hold great cultural and religious significance in Hinduism and has inspired literature, art, music, dance, and theater for centuries.


Overall, the Ramayana remains a timeless epic that continues to resonate with people of all ages, imparting valuable teachings and inspiring devotion to Lord Rama.

Divya Drishti : history of Christianity - Birth of Jesus Christ

 Certainly! Here's an overview of the history of Christianity:


Divya Drishti : To create a YouTube channel - how to make youtube channel

 To create a YouTube channel:


1. **Sign in to YouTube**: Go to the YouTube website and sign in with your Google account. If you don't have a Google account, create one first.


2. **Configure Channel Settings**: After signing in to YouTube, choose a name for your channel and configure the settings for your channel.


3. **Add Profile Picture and Banner**: Upload an appealing profile picture and banner for your channel.


4. **Create and Upload Videos**: Create videos for your channel and upload them. Make sure your videos are engaging and of high quality.


5. **Promote Your Videos**: Share your videos on social media and invite more people to your channel.


6. **Regularly Upload Videos**: Keep your channel active by regularly uploading new videos to keep your audience engaged.


7. **Engage with the Community**: Interact with your viewers, listen to their feedback, and respond to their questions.


Keep in mind that you need to adhere to YouTube's rules and guidelines when creating your channel. Also, practice consistency and integrity when uploading your videos.

Divya Drishti : YouTube Channel Kaise Banaye - YouTube Channel Banane Ka Sahi Tarika

 YouTube पर अपना चैनल बनाना बहुत ही आसान है। निम्नलिखित चरणों का पालन करें:


1. **YouTube पर साइन इन करें**: YouTube की वेबसाइट पर जाएं और अपने Google खाते से साइन इन करें। अगर आपके पास Google खाता नहीं है, तो पहले एक बनाएं।


2. **चैनल सेटिंग्स कॉन्फ़िगर करें**: YouTube पर साइन इन करने के बाद, अपने चैनल के लिए एक नाम चुनें और अपने चैनल की सेटिंग्स को कॉन्फ़िगर करें।


3. **प्रोफ़ाइल तस्वीर और बैनर जोड़ें**: अपने चैनल के लिए एक अपीलिंग प्रोफ़ाइल तस्वीर और बैनर जोड़ें।


4. **वीडियो बनाएं और अपलोड करें**: अपने चैनल पर अपने द्वारा बनाए गए वीडियोज़ बनाएं और अपलोड करें।


5. **अपने वीडियो का प्रचार करें**: अपने वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करें और अधिक लोगों को अपने चैनल पर आमंत्रित करें।


6. **नियमित रूप से वीडियो अपलोड करें**: अपने चैनल पर नियमित रूप से वीडियो अपलोड करें ताकि आपके दर्शकों को नए वीडियोज़ का उत्साह बना रहे।


7. **समुदाय से इंगेज हों**: अपने दर्शकों के साथ संवाद करें, उनकी प्रतिक्रिया सुनें, और उनके प्रश्नों का उत्तर दें।


ध्यान दें कि चैनल बनाने के लिए आपको YouTube की नियम और शर्तों का पालन करना होगा। अपने वीडियोज़ को अपलोड करते समय भी समांतर और नैतिकता के लिए ध्यान दें।

Divya Drishti : फोटो बेच कर पैसा कैसे कमाएं - Photo bech kar paisa kaise kamaye

 फोटोग्राफी एक उत्कृष्ट तरीका हो सकता है जिससे आप पैसा कमा सकते हैं। यहां कुछ तरीके हैं जिनके माध्यम से आप अपनी फोटोग्राफी कौशल का उपयोग करके पैसा कमा सकते हैं:


1. **फोटो स्टॉक वेबसाइट्स**: अपनी फोटोग्राफी को स्टॉक फोटोग्राफी वेबसाइट्स पर अपलोड करें, जैसे कि Shutterstock, Adobe Stock, और Getty Images। जब लोग आपकी तस्वीरें खरीदते हैं, तो आपको कमीशन मिलता है।


2. **फोटो ब्लॉग या पोर्टफोलियो**: अपने फोटोग्राफी पोर्टफोलियो को ब्लॉग या वेबसाइट पर साझा करें। आप अपने ब्लॉग पर विज्ञापन डिस्प्ले कर सकते हैं या अपनी फोटोग्राफी सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन प्राप्त कर सकते हैं।


3. **फोटोग्राफी सेवाएं**: विभिन्न आयोजनों, शादियों, या इतिहासी घटनाओं के लिए फोटोग्राफी सेवाएं प्रदान करें।


4. **फोटो उत्पादन और बिक्री**: कस्टम फोटो उत्पादों की बिक्री करें, जैसे कि पोस्टर, कार्ड, या कैलेंडर।


5. **फोटो ट्यूटोरियल्स और कोर्सेस**: ऑनलाइन फोटोग्राफी सीखने के लिए ट्यूटोरियल्स या कोर्सेस बनाएं और उन्हें बेचें।


ये कुछ उपाय हैं जिनके माध्यम से आप अपनी फोटोग्राफी कौशल का उपयोग करके पैसा कमा सकते हैं। ध्यान दें कि आपकी क्षमताओं, पसंदों, और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार, आप अन्य भी तरीके ढूंढ सकते हैं।

Divya Drishti : पैसा कमाने का 10 तरीका

पैसा कमाने के कई तरीके हैं, लेकिन कुछ मुख्य और प्रसिद्ध तरीके निम्नलिखित हो सकते हैं:




1. **नौकरी**: एक नौकरी या स्थिर रोज़गार प्राप्त करें जो आपको नियमित आय प्रदान करेगा।


2. **व्यापार शुरू करें**: अपना व्यापार शुरू करें, जैसे कि दुकान, ऑनलाइन विपणन, या सेवा प्रदान करना।


3. **फ्रीलांसिंग**: अपनी कौशल के आधार पर फ्रीलांस काम करें, जैसे कि लेखन, डिज़ाइन, वेब डेवलपमेंट, या मार्केटिंग।


4. **स्टॉक मार्केट**: शेयर बाजार में निवेश करें और अपनी निवेशक आय बढ़ाएं।


5. **अध्ययन और प्रशिक्षण**: अपने दक्षता को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और पढ़ाई में निवेश करें, जिससे आप अधिक उच्च वेतन प्राप्त कर सकते हैं।


6. **ब्लॉगिंग और व्यवसायिक यूट्यूब**: व्यक्तिगत ब्लॉग या यूट्यूब चैनल शुरू करें और एड रिवेन्यू, स्पॉन्सर्ड पोस्ट्स, और एफिलिएट मार्केटिंग के माध्यम से पैसा कमाएं।


7. **अधिकारिक निवेश**: विभिन्न संपत्तियों जैसे कि आवास, कमर्शियल प्रॉपर्टी, और बैंक आदि में निवेश करें।


8. **रियल एस्टेट**: घरों या संपत्तियों को खरीदें और उन्हें बिक्री के लिए पुनः निर्माण करें या किराए पर दें।


9. **ऑनलाइन खरीददारी और बेचना**: ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर उत्पादों को खरीदें और उन्हें बेचें, जैसे कि इबे, एमेज़न, या फ्लिपकार्ट।


10. **आर्थिक

Divya Drishti : किसी भी कार्य को सफलता पूरक कैसे करें ? Kisi Bhi Kary Ko Safalta Puravak Kaise Karen

  💠 आप यदि किसी काम को सफलता पूरक करना चाहते है तो आप को दो बाते आवश्य ध्यान में रखना आवश्य हैं 

नहीं तो आप जिस भी काम को पूरा करना चाहते है वह काम कभी भी सफलता पूर्वक नही हो पाएगा

वो दो बाते किया है चलिए जानते हैं ऐसा कोनसा दो महत्व पूर्ण बाते है जो हमें याद रखना जरुरी हैं

🫠🫠🫠🫠🫠🫠🫠🫠

पहला टॉपिक

1.आप जो भी कार्य करना चजलहते है उससे जबतक पूरा ना हो किसी के साथ वह बात शेयर नही करना है🤫

ऐसा क्यू करना है इसके बारे में भी में बताऊंगा🤔

जिस भी दोस्त रिश्तेदार को अपना कार्य के लिए बोल रहे है हो सकता है की ओह दोस्त आप से अंदर ही अंदर आपसे जलता है जलांसिल रखता हो 

और आप अपने सफल कार्य के लिए बाते उन से शेयर कर रहे है लेकिन ओह आप से अंदर ही अंदर जल रहा है और आपको आपके कार्य के लिए असहल होने के लिए पार्थना कर रहे है ये तो आप को नही पता होगा लेकिन ओह कर रहा होगा 🙏

इससे आप के कार्य में किया परभाव पड़ेगा ?

कभी_कभी ऐसा होता है की किसी किसी का बद्दूवा , अंदर से गली , या पर्थना जो आदमी किसी और के लिए कर रहा है ओह सच हो जाता है कसर ऐसा देखा गया है


जैसे :- की हम ऐसा जीज कल्पना कर लेते है जो कभी भी नही हो सकता लेकिन अचानक से ओह हो जाता है |


उसी तरह.....

किसी का अंदर से तड़प किसी को भी बड़ी दुघटना पहुंचा सकता है