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Divya Drishti: कलि युग - कलयुग है चारम पर

हिन्दू सिद्धान्त: युग और कलियुग विश्व की आयु के सम्बन्ध में हिन्दू सिद्धान्त विश्व की आयु के सम्बन्ध में हिन्दू सिद्धान्त तीन प्रकार के समयविभाग उपस्थित करता है। वे हैं-युग, मन्वन्तर एवं कल्प। युग चार हैं-कृत, त्रेता, द्वापर एवं कलि। ये प्राचीनोक्त स्वर्ण, रूपा, पीतल एवं लौह युग के समानार्थक हैं। उपर्युक्त नाम जुए के पासे के पक्षों के आधार पर रखे गए हैं। कृत सबसे भाग्यवान् माना जाता है, जिसके पक्षों पर चार बिन्दु हैं, त्रेता पर तीन, द्वापर पर दो एक कलि पर मात्र एक बिन्दु है। ये ही सब सिद्धान्त युगों के गुण एवं आयु पर भी घटते हैं। युग आयु युगों में मनुष्य के अच्छे गुणों का ह्रास होता है तथा युगों की आयु भी क्रमश: 4800 वर्ष, 3600 वर्ष, 2400 वर्ष व 1200 वर्ष है। सभी के योग को 'महायुग' कहते हैं, जो 12000 वर्ष का है। किन्तु ये वर्ष दैवी हैं और एक दैवी वर्ष 360 मानवीय वर्ष के तुल्य होता है, अतएव एक महायुग 43,20,000 वर्ष का होता है। कलि का मानवीय युगमान 4,32,000 वर्ष है। मान्यताएँ ...

Divya Drishti: Daily Earning Simple Task

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Divya Drishti :- झारखंड - All District Name Of Jharkhand | Jharkhand Agriculture

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  झारखंड झारखंड भारत का एक राज्य है, जो भूमध्य स्थल में स्थित है। यह राज्य 15 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ से अलग होकर अलग राज्य के रूप में गठित किया गया था। झारखंड का नाम 'झार' और 'खंड' के शब्दों से मिलकर बना है, जो 'वन का टुकड़ा' का अर्थ करता है, जो इसके घने जंगलों की विशेषता को दर्शाता है। झारखंड की राजधानी रांची है और यहाँ की मुख्य भाषा हिंदी और संगठित रूप से उच्चतम शैक्षणिक स्तर के लिए जाना जाता है। झारखंड में अनेक प्राचीन धरोहर और पर्यटन स्थल हैं, जो इसकी समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को दर्शाते हैं। झारखंड में कुल 24 जिले हैं। निम्नलिखित हैं: 1. बोकारो 2. चाट्रा 3. देवघर 4. धनबाद 5. दुमका 6. ईस्ट सिंघभूम 7. गढ़वा 8. गिरीदीह 9. गोड्डा 10. हजारीबाग 11. जामताड़ा 12. खूंटी 13. कोडरमा 14. लटेहार 15. लोहरदगा 16. पकुड़ 17. पालामू 18. रामगढ़ 19. रांची 20. सहीबगंज 21. सराइकेला-खरसावां 22. सिमडेगा 23. वेस्ट सिंघभूम 24. जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) बोकारो बोकारो झारखंड राज्य का एक जिला है, जो पूर्वी झारखंड क्षेत्र में स्थित है। यह जिला उद्योग, खनन, और विभिन्न विनिर्...

Divya Drishti : ओम - Om

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                             ॐ ओ३म्‌ की ध्वनि का सभी सम्प्रदायों में महत्त्व है। ॐ हिन्दू धर्म का प्रतीक चिह्न ही नहीं बल्कि हिन्दू परम्परा का सबसे पवित्र शब्द है। हमारे सभी वेदमंत्रों का उच्चारण भी ओ३म्‌ से ही प्रारंभ होता है, जो ईश्र्वरीय शक्ति की पहचान है। परमात्मा का निज नाम ओ३म्‌ है। अंग्रेज़ी में भी ईश्र्वर के लिए सर्वव्यापक शब्द का प्रयोग होता है, यही सृष्टि का आधार है। यह सिर्फ़ आस्था नहीं, इसका वैज्ञानिक आधार भी है। प्रतिदिन ॐ का उच्चारण न सिर्फ़ ऊर्जा शक्ति का संचार करता है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाकर कई असाध्य बीमारियों से दूर रखने में मदद करता है। आध्यात्म में ॐ का विशेष महत्त्व है, वेद शास्त्रों में भी ॐ के कई चमत्कारिक प्रभावों का उल्लेख मिलता है। आज के आधुनिक युग में वैज्ञानिकों ने भी शोध के मध्यम से ॐ के चमत्कारिक प्रभाव की पुष्टी की है। पाश्चात्य देशों में भारतीय वेद पुराण और हज़ारों वर्ष पुरानी भारतीय संस्कृति और परम्परा काफ़ी चर्चाओं और विचार विमर्श का केन्द्र रहे हैं दूसरी ओर वर्तम...

Divya Drishti : हनुमान - Hanuman

  हनुमान हिंदू धर्म में भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त और भारतीय महाकाव्य रामायण में सबसे महत्वपूर्ण पौराणिक चरित्र हैं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार हनुमान एक वानर वीर थे। (वास्तव में वानर एक विशेष मानव जाति ही थी, जिसका धार्मिक लांछन (चिह्न) वानर अथवा उसकी लांगल थी। पुरा कथाओं में यही वानर (पशु) रूप में वर्णित है।) भगवान राम को हनुमान ऋष्यमूक पर्वत के पास मिले थे। हनुमान जी राम के अनन्य मित्र, सहायक और भक्त सिद्ध हुए। सीता का अन्वेषण (खोज) करने के लिए ये लंका गए। राम के दौत्य (सन्देश देना, दूत का कार्य) का इन्होंने अद्भुत निर्वाह किया। राम-रावण युद्ध में भी इनका पराक्रम प्रसिद्ध है। वाल्मीकि रामायण सुन्दर काण्ड के अनुसार लंका में समुद्रतट पर स्थित एक 'अरिष्ट' नामक पर्वत है, जिस पर चढ़कर हनुमान ने लंका से लौटते समय, समुद्र को कूद कर पार किया था। रामावत वैष्णव धर्म के विकास के साथ हनुमान का भी दैवीकरण हुआ। वे राम के पार्षद और पुन: पूज्य देव रूप में मान्य हो गये। धीरे-धीरे हनुमंत अथवा मारूति पूजा का एक सम्प्रदाय ही बन गया। 'हनुमत्कल्प' में इनके ध्यान और पूजा का विधान पाया जात...

Divya Drishti : चित्रगुप्त पूजा

 चित्रगुप्त पूजा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो चित्रगुप्त देवता की पूजा और आराधना के लिए मनाया  जाता है। चित्रगुप्त देवता हिंदू धर्म में यमराज के मंत्री माने जाते हैं और उन्हें लोग कर्मचारी देवता मानते हैं, जो लोगों  के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। इस पूजा को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। चित्रगुप्त पूजा में लोग चित्रगुप्त देवता को पूजते हैं और  उनके लिए विशेष भोग चढ़ाते हैं। पूजा के दौरान विधिवत  अर्चना, आरती, भजन, और मंत्र उच्चारण किया जाता है। लोग अपने कर्मों के लिए चित्रगुप्त देवता से क्षमा प्रार्थना  करते हैं और उनसे अच्छे कर्मों की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। चित्रगुप्त पूजा का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि लोग अपने कर्मों का सच्चा लेखा-जोखा रखें और उनके द्वारा किए  गए पाप और पुण्य का संदेश लें। यह पूजा अपने कर्मों की सच्चाई को समझने और सजग रहने के लिए महत्वपूर्ण होती है। Read More AdMob Ad Example

Divya Drishti : Ramayana - रामायण

  The Ramayana is one of the most revered and ancient epic poems in Hindu mythology. It tells the story of Lord Rama, the seventh incarnation of Lord Vishnu, and his journey to rescue his wife Sita from the demon king Ravana. Here are some key aspects of the Ramayana: 1. **Authorship**: Traditionally attributed to the sage Valmiki, the Ramayana is believed to have been composed over 2,000 years ago. 2. **Plot**: The epic narrates the life and adventures of Lord Rama, his exile to the forest for 14 years along with his wife Sita and brother Lakshmana, the abduction of Sita by Ravana, and the subsequent war between Rama and Ravana's forces. 3. **Characters**: The Ramayana features several important characters, including Lord Rama, Sita, Lakshmana, Hanuman, Ravana, and many others, each playing a significant role in the story. 4. **Themes**: The Ramayana explores various themes such as dharma (duty/righteousness), devotion, loyalty, the battle between good and evil, and the triumph of...